इस साल 2018 में दीपावली का पर्व 7 नवंबर दिन बुधवार को मनाया जायेगा । स्कंद पुराण में वर्णन आता हैं कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन उपवास रखते हुए शुभ मुहूर्त में अन्य सभी देवताओं की पूजा करने के बाद श्री महालक्ष्मी एवं श्रीगणेश जी की घर में चौकी पर स्वास्तिक बनाकर, चावल के आसन पर नई मुर्ति या फोटों स्थापित करके सोलह प्रकार के स्थुल पदार्थों से विशेष पूजन करना चाहिए । दिवाली के दिन इस षोडशोपचार पूजन मंत्र विधि से मां लक्ष्मी का पूजन करें । षोडशोपचार पूजन श्रीसूक्तम मंत्रों के साथ करने से माता शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं ।

चौकी पर स्थापित मूर्तियों के दाहिने ओर कलश एवं बाई ओर घी का दीपक स्थापित करें । फिर गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करें । पूजा के समय 11 आटे के दीपक घर में जलने वाले दिपकों को छोड़कर पूजा स्थल पर जलावें । अन्य मिट्टि के दीप घर के चौखट, खिड़कियों, किचन व छतों पर जलाकर अवश्य रखे । पूजा की चौकी पर जो बड़ा दीपक जलाया हैं उसे रात से लेकर दूसरे दिन सुबह तक जलाये रखे ।

श्री महालक्ष्मी षोडशोपचार पूजा विधि – श्रीसूक्तम्

यःशुचिः प्रयतोभूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।

सूक्तमं पंचदशर्च श्रीकामःसततं जपेत् ।

अर्थात दिवाली पूजन के अलावा जो भी व्यक्ति प्रतिदिन श्रीसूक्तम् का 16 बार पाठ करता है उसे कभी धन की कमी नही होती ऐसा माँ महालक्ष्मी का वरदान है ।

1- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी का आवाहन करे ।

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

2- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को फूल व चावल का आसन देवें ।

ॐ तां म आ व ह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।

3- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी के शुद्ध जल से पैर धुलावें ।

ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद्प्रमोदिनीम् ।

श्रियं देवीमुप ह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

4- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को जल से अर्घ्य प्रदान करें ।

ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद्मेस्थितां पदमवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

5- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को शुद्ध जल से आचमन करावें ।

ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्ती श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।

तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

6- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को गंगाजल मिले जल से स्नान करावें ।

ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्य अलक्ष्मीः ।।

7- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को गुलाबी या लाल वस्त्र भेट करें ।

उपैतु मां देवसखः किर्तिश्च मणिना सह ।

प्रदुभुर्तॉऽस्मि रास्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिंमृद्धिम ददातु मे ।।

8- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को चुनरी भेट करें ।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठमलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।

अभूतिमसमृद्धि च सर्वां निर्गुद में गृहात् ।।

9- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को सुगंधित चन्दन का तिलक लगावें ।

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप हवये श्रियम् ।।

10- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को सौभाग्यद्रव्य के रूप सिन्दूर आदि चढ़ावें ।

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि ।

पशुनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

11- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को सुगंधित कमल एवं गुलाब के पुष्पों की माला एवं खुले पुष्प चढ़ावें ।

कर्दमेन प्रजा भूता मयि संभव कर्दम ।

श्रियम वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।

12- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को सुंगधित धुप दिखावें ।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस् मे गृहे ।

नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।

13- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को घी का दीपक दिखावें ।

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंडगलां पदमालिनीम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।

14- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को नैवेध, मेवे का भोग लगावें ।

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आ वह ।।

15- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को दक्षिणा, आरती एवं पुष्पांजलि देवें ।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मी मन पगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

16- इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता लक्ष्मी को दंडवत प्रणाम करें ।

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।

सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।।

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